Wednesday, 31 August 2016

Uttrakhand Competition Exam, Technology, Motivation, Latest News, Amazon Affiliate, Ki Online Classes, Sabhi Jankari Hindi Me

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Sunday, 23 July 2017

Uttarakhand Group C 2300 Post Requirement 2017 | समूह ग के लिए जल्दी आवेदन करे


Hello Dosto TechGuruVishal.com me Aapka swagat hai.
Dosto agar aap Ukpsc, Group "C ki tayari kar rahe hai to aapko ye jankar bahut khushi hogi ki jaldi hi Group C ki 2300 post aane wali hai.
aajki post me hum aapko btane wale kaise aap in post ko check karke pta lga sakte hai ki kb aayenge ye post.






Hamare bahut se dosto ne humse pucha hai ki hume pta hi nhi chal paya yr kb group c yani समूह ग ki notification aati hai aur kb last date nikal jati hai to dosto aapko ab tension free ho jaye kyuki aajki is post me aapko pta chal jayega aa0 kese samuh g ki vacancy ki notification khud apne android ya java ya kisi bhi mobile se check kar sakte hai.

Group C ki pariksha bahut hi easy pariksha hoti hai kyuki isme aapko Uttarakhand history ki jyada hone par aapko iska jyada benifit mil jata hai dosto next post me hum aapko ye bhi bataye aap group c ki pariksha ke liye kese tayari kar sakate hai to hum aapka jyada time na lete hue ye batate hai kese aap group c exam ka notification check kar sakte hai.



Group me kis tarah ke Question aate hai kese tayari kare iske liye aap hmare youtube Channel Vishal Competition Exam Online Classes par hmari videos dekhkar tayari kar sakte hai.


Dosto aapko kuch steps bta rha hu aap in steps ko follow karke group c ki pariksha ka notification apne mobile se check kar sakte hai.


Group C Exam notification Kaise kare


Dosto group c ki apni official website hai   Click Here  jispar aap sabhi notification bahut easy tarah se dekh sakte hai.


Step -1. Sabse pehle aap Google.com open kijiye Google ke search box me aapko sssc.uk.gov.in search karna hai screenshot me ap dekh sakte hai.





Step -2. Ab aapko kuch is tarah ki website open nazar aayega ye group c ki official Website hai screenshot me dekhiye





Step- 3. Ab aap website ko click karke thoda neeche dekhiyega aapko Exam/Requirement likha dikhai dega aap is par click kijiye.




Step -4. Ab aapko group c ki latest vacancy ki jankari mil jaayegi.








To dosto ye bahut hi aasan sa tarika Humne aapko btaya hai group c ki post ko online check karne ka ab aap sabhi post ki notification k8 Jankari aaram se prapt kar sakte hai dosto ye post aapko acchi lgi to apne social media par isko jyada se jyada share kijiye.








Sunday, 4 June 2017

Uttrakhand का नदी तंत्र | Canal system | नहर सिस्टम | Spacial Edison For Online Classes,

Hello Friends TechGuruVishal Online  Classes में आपका स्वागत हैं

आज हम आपको Uttarakhand के नदी तंत्र | Canal System, नहर सिस्टम के बारे में बताएंगे ये एक Spacial Edison हैं उन Students के लिए जो प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं





Uttrakhand का नहर सिस्टम







Yamuna यमुना - यमुना नदी उत्तरकाशी जनपद के बन्दर पूँछ पर्वत के पश्चिम स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर के यमुनोत्री कांया नामक स्थान से निकलती है .उत्तरकाशी के बाद ये देहरादून में प्रवेश करती हैं .



जहाँ देहरादून के विकास नगर में स्थित डाकपत्थर के समीप दाहिनी और से इसमें टोंस नदी मिलती हैं .

टोंस नदी का उद्गगम ( Uttarakashi ) उत्तरकाशी में यमुनोत्री हिमनद के पश्चिम में स्थित रुपिंग शूपिंग हिमनद से निकलती हैं .
Uttrakhand और हिमाचल का बॉर्डर बनाते हुए यमुना में मिल जाती हैं .

टोंस के बाद देहरादून में ही हिमाचल प्रदेश से आकर पोंटा साहिब के निकट यमुना में दाईं और से गिरी नदी आकर मिलती हैं .

इसके बाद यमुना UttrakhandHimachal pradesh का। बॉर्डर बनाते हुए भालीपुर में राज्य से बाहार हो जाती हैं .
तथा इलाहाबाद में गंगा नदी में मिल जाती हैं यमुना नदी पर ही Dehradun देहरादून में आसन बेराज बनाया हैं .






● भागीरथी तंत्र - भागीरथी नदी Bhagirathi System गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख नामक स्थान से निकलती हैं .
गंगोत्री के समीप भागीरथी में मिलून गंगा, जाड़ गंगा, केदार गंगा, झाला के पास शियाल गंगा आदि नदिया मिलती हैं .






गणेश प्रयाग - ( पुराना टिहरी शहर/Old Tehri ) - जो अब डूब गया हैं भागीरथी नदी के खतलिंग ग्लेशियर ( टिहरी/Tehri ) से निकल कर भिलंगना नदी से मिलती हैं .
दूध गंगा, बाल गंगा, मेवे गंगा, धर्म गंगा आदि नदिया भिलंगना की सहायक नदियां हैं .
देवप्रयाग में भागीरथी नदी अलकनंदा में मिल जाती हैं






Ganga River/गंगा तंत्र - गंगा नदी उत्तरकाशी जनपद के ग्लेशियर से निकलती हैं .
गंगोत्री से लेकर देवप्रयाग ( Tehri Garhwal/टिहरी गढ़वाल ) तक इसे भागीरथी के नाम से जाना जाता हैं देवप्रयाग में भागीरथी  व अलकनंदा मिलकर गंगा के नाम से आगे को बहती हैं .


पौड़ी में व्यासघाट के पास दूधातोली पर्वत से निकलकर बाई और से नयार नदी नमिलती हैं ( दूधातोली पर्वत का विस्तार पौड़ी चमोली और अल्मोड़ा आदि की सीमा पर स्थित हैं )
देहरादून के चंद्रपाड़ी झील से निकलकर ऋषिकेश ( देहरादून) में दाई और से गंगा नदी में चंद्रभागा नदी निकलती हैं .

सिरकंडा पर्वत ( टिहरी गढ़वाल ) से निकलकर दाई ओर से सोम नदी मिलती है .

Haridwar में गंगा नदी में रतमान और सौलानी नदिया मिलती हैं .

हरिद्वार में गंगा नदी मैदान में प्रवेश करती हैं .






Alakannda System/अलकनंदा तंत्र - अलकनंदा नदी चमोली के उत्तरी भाग में स्थित सतोपंथ ( अल्कापि ) शिखर के हिमनद और सतोपंथ ताल से निकलकर देवप्रयाग ( टिहरी गढ़वाल ) में भागीरथी नदी में मिल जाती हैं .

अलकनंदा नदी में हेमकुण्ड झील से आकर लक्ष्मण गंगा नदी मिलती हैं .

कामेट पर्वत से निकलकर केसवप्रयाग ( चमोली ) में सरस्वती नदी मिलती है .

केशवप्रयाग के बाद विष्णु प्रयाग ( Chamoli/चमोली ) में त्रिशूल पर्वत के जास्कर श्रेणी से निकलकर धौली गंगा तथा कामेट पर्वत सर निकलकर विष्णु गंगा नदिया मिलती है .



गणेश गंगा, कियोगार गंगा, गिरथी गंगा, व ऋषि गंगा आदि धौली की सहायक नदियां हैं .

नंदप्रयाग ( चमोली ) में नंदाधूम्ति ( त्रिशूल पर्वत ) से निकलकर नंदाकिनी में मिलती हैं .

कर्णप्रयाग (चमोली ) में पिंडारी ( बागेश्वर ) ग्लेशियर से निकलने वाली पिण्डर नदी निकलती है .

Rudraprayag में चोराबाड़ी ताल से निकलकर मन्दाकिनी नदी निकलती हैं .

देवप्रयाग ( टिहरी गढ़वाल ) में अलकनंदा ( बहू ) भागीरथी ( सास ) में मिल जाती हैं .

यही से इसका नाम Ganges/Ganga-गंगा हो जाता हैं .





पश्चिमी रामगंगा तंत्र





● यह नदी तंत्र चमोली, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, में फैले दूधातोली पर्वत पौड़ी भाग के जलागम क्षेत्र से निकलती हैं .

चमोली, अल्मोड़ा व पौड़ी में 155 K/m बहने के बाद कालागढ़ (पौड़ी ) नामक स्थान से राज्य से बाहर हो जाती हैं तथा कन्नौज के पास गंगा नदी में मिल जाती हैं .

बिरमा, बिन्नो आदि इसकी सहायक नदियां भी हैं .





Kosi River/कोसी नदी - कोसानी से निकलकर रामगंगा के पूरब में समान्तर अल्मोड़ा, नैनीताल व ऊधम सिंह नगर में सुल्तानपुर नामक स्थान पर राज्य से बाहर होती हैं तथा Uttar Pradesh में रामगंगा नदी में मिल जाती हैं





दाबका नदी - दाबका नदी नैनीताल में गरम पानी नामक स्थान के पश्चिम से निकलकर ऊधम सिंह नगर में बहकर बाजपुर में राज्य से बाहर हो जाती हैं .





बाकरा नदी - Nainital से निकलकर दाबका के पूर्व में समान्तर बहने के बाद नैनीताल तथा ऊधम सिंह नगर में बहने के बाद खानपुर से बाहर हो जाती हैं .





गोला नदी - गोला नदी नैनीताल के पहाड़ नामक स्थान से निकलकर बाकरा नदी के पूरब की और उसके समांतर नैनीताल तथा ऊधम सिंह नगर में बहने के बाद किच्छा के पास राज्य से बाहर हो जाती हैं .





देओहा नदी - नैनीताल से निकलकर गोला नदी के पूरब में और उसके समान्तर बहकर ऊधम सिंह नगर में राज्य सर बाहर हो जाती हैं .




नंघोर - नैनीताल के नंघोर वैली के पास देओहा नदी से निकलकर नानकसागर (Nainital+udham singh nagar के बॉर्डर पर स्थित ) में समाहित हो जाती हैं .





काली नदी - काली नदी Uttrakhand पूरब में स्थित हैं Pithoragarh के कालापानी नामक स्थान से निकलती हैं .

आकागिरी पर्वत के समानांतर बहने के बाद भारत तथा नेपाल का बॉर्डर बनाते हुए पिथौरागढ़ के बाद यह चंपावत में प्रवेश करती हैं .
और टनकपुर ( चम्पावत ) के पास पूर्णगिरी तीर्थ के समीप ब्रह्मदेव मण्डी के बाद से शारदा के नाम से नेपाल में प्रवेश करती हैं .




कुठयांगति तंत्र - यह काली की प्रमुख प्रथम सहायक नदी हैं . जिसका उदगम जक्सर श्रेणी के पश्चिमी ठाल से होता हैं .
लंगचुना निरकुठ तथा घुमका आदि कुठयन्ति की सहायक नदियां हैं .





पूर्वी धोली Canal system गंगा - कठ्यांगली के बाद काली में दाहिने और से स्यालपंथ के पास खेला नामक स्थान पर पूर्वी धोली गंगा नदी काली में मिल जाती हैं .
लिस्सर, नानदारमा, सेलायांगठी एवं कंचूथ्रिच आदि पूर्वी धोली गंगा की सहायक नदियां हैं .




गौरी गंगा तंत्र - मिलन हिमनद से निकलकर पूर्वी धोली गंगा के बाद जौलजीवी
 में काली नदी में मिल जाती हैं .





सरयू तंत्र - इसका उदगम बागेश्वर के उत्तर में स्थित पिण्डारी ग्लेशियर के सरयू नामक स्थान से हुआ हैं .

जो Pithoragarh, Almora, का बॉर्डर बनाते हुये पंचेश्वर के निकट  काली नदी में दाहिनी और से मिल जाती हैं .

तथा पश्चिम से पूरब की और बहती हैं .
सरयू की प्रथम सहायक नदी गोमती हैं . जो देवरा से निकलकर बागेश्वर में सरयू में मिल जाती हैं .
आक्डी़घाट में सरयू में पनार नदी मिलती हैं .
जिसका उद्गगम अल्मोड़ा तथा नैनीताल की सीमा से होता हैं .

काकड़ीघाट से पूर्व में रामेश्वर तीर्थ ( पिथौरागढ़ ) के पास सरयू में पूर्वी रामगंगा नदी मिलती हैं .
जिसका उद्गगम पिथौरागढ़ के पोंटिंग तथा नामिक हिमनद से होता हैं .





लधिया नदी - इस नदी का उदगम पिथौरागढ़ , अल्मोड़ा, के मिलन बिंदु गुजार से होता हैं .
जो काली ने दाहिनी और से चूका ( चम्पावत ) के पास काली में मिल जाती हैं .
तथा पश्चिम से पूरब की और बहती हैं ।




● आखिरी बात- दोस्तों अगर ये पोस्ट आपको अच्छी लगी तो आप इसको अपने दोस्तों को जरूर Share कीजिये और अगर आप प्रतियोगिता परीक्षा की और ज्यादा जानकारी पाना चाहते है तो आप हमारे YouTube Channel par वीडियो के माध्यम से सभी प्रतियोगिता परीक्षा की videos देख सकते है 

Saturday, 3 June 2017

Uttrakhand की झीले | History Of Uttrakhand ( Part -2) Online Classes,

Vishal Online Classes में आपका स्वागत हैं !




● दोस्तों आज Vishal Online Classes में हमने आपको History Of Uttrakhand Part -2 में Uttarakhand की झीलों के बारे में विस्तार से बताया हैं ये जानकारी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए बहुत मददगार हैं ।
 अगर आप Ukpsc, Group "C uttrakhand समूह "ग की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आप हमारी सभी पोस्टो को पढ़िए आपके लिए ये बहुत मददगार साबित होंगी आप इस Post को ज्यादा से ज्यादा Share भी कीजिये !



 ● Uttrakhand की झीले 



 ● नैनीताल - स्कन्द पुराण के मानस खंड में इसे ऋषि सरोवर कहा गया हैं . इस झील में चारो और केवल दक्षिण पूर्वी को छोड़कर सात पहाड़िया हैं. 

● हाड़ीवादी


 ● आयरपात


 ● देवताल


 ● चिनापिक या चाइना पीक 


 ● स्नोव्यू 


 ● आलमसरिया 


 ● कोटा और शेरडांडा


 ● खुर्पाताल, सूखाताल, मालुवाताल, सड़ियाताल, हरीशताल, आदि नैनीताल में हैं. 


 ● यह समुन्द्र तल से लगभग 1937 मी. हैं इस झील में बीच में चट्टान तल्लीताल और मल्लीताल में विभाजित करती हैं.  

● इसका नाम शिव की पत्नी सती के नयन गिरने के कारण प्रतिष्टित नयना देवी के नाम पर नैनीताल पड़ा इसकी खोज C.V Betan ने 1841 में की थी. 



 ● सातताल - नैनीताल से 22 K/m तथा भीमताल से 4 K/m की दूरी पर स्थित हैं.



 ● खुर्पाताल - इसकी आकृति घोड़े के खुर के समान हैं. इसकी गहराई 19 मी. हैं यह नैनीताल कालाढूंगी मार्ग पर स्थित हैं इसकी लंबाई 1635 मी. तथा चौड़ाई 500 मी. हैं. और समुद्र तल से 1635 मी. हैं. 



 ● भीमताल - काठगोदाम से उत्तर तथा नैनीताल से पूरब में नैनीताल जिले में स्थित हैं. यह कुमाऊँ क्षेत्र सबसे बड़ी झील हैं. इसकी लंबाई 1674 मी. और चौड़ाई 447 मी. तथा गहराई 26 मी. है. इसका आकार त्रिभुज के समान हैं इसके जल का रंग गहरा नीला हैं. 



 ● नौकुचियाताल - यह भीमताल से दक्षिण पूर्व की और स्थित हैं. यह कुमाऊँ की सबसे गहरी झील हैं. जिसकी गहराई 40 M. हैं. पक्षियों के निवास के लिए यहाँ विदेशी पक्षी भी आते हैं . 



 ● द्रोण ताल- यह ऊधम सिंह नगर के काशीपुर के पास स्थित है गुरु द्रोण ने अपने शिष्यो को यही पर धनु विद्या की शिक्षा दी थी .



 ● गिरीताल - ऊधम सिंह नगर के मोटर मार्ग पर स्थित हैं . यहाँ पर चामुंडा देवी, संतोषी माता, नागनाथ व मंशादेवी आदि के मन्दिर स्थित हैं .



 ● झिलमिल ताल - ये चम्पावत के टनकपुर में स्थित हैं . 



 ● श्याम ताल - यहां सफ़ेद कमल पुष्प भी मिलते हैं . यहां झूला मेला भी लगता हैं . इस झील के किनारे स्वामी विवेकानंद का आश्रम भी हैं . यहां सूखाताल, नागताल, स्वामी ताल आदि हैं . ऊंची -ऊंची पर्वतमाला तथा सीडीनुमा खेतो से घिरा हैं . ( चम्पावत से टनकपुर ) 



 ● तडागताल - अल्मोड़ा में चौखुटिया के पास स्थित हैं . इसकी लंबाई 1000 मी. चौड़ाई 500 मी. हैं . ग्रीष्म काल में इसका कुछ भाग सूख जाता है . जिसमे स्थानीय जनसमुदाय के लोग खेती करते हैं इस झील के निचले भाग में पानी की निकासी के लिए 5 सुरंगे हैं जिसमे से 3 सुरंगे बन्द हैं !



 ● गढ़वाल की झीले 



 ● चमोली - यह रूपकुंड, चमोली जिले में थराली के पास स्थित हैं . इस झील का निर्माण शिव-पार्वती ने कैलाश जाते समय किया था . पार्वती ने सौन्दर्य का आधा भाग इसी भाग में छोड़ दिया था इसलिए ये सुन्दर हैं . राजा यग्नपाल ओर रानी बलपा और उसके सैनिको के कंकाल आज भी यहाँ मिलते हैं. इसीलिये झील को कंकाली ताल भी कहते हैं इसे रहस्यमय भी कहते हैं 



 ●हेमकुण्ड - यह रूपकुंड से 17-18 K/m. पूर्व की और स्थित हैं . नंदा का डोला प्रत्येक 12 वर्ष में यही रखा जाता हैं . यही से प्रत्येक 12 वर्ष में नन्दाराजजात यात्रा का चार सींगो वाला मेला (खाटू ) प्रत्येक 12 वर्ष के बाद अकेला जाता हैं  



लोकपाल (हेमकुण्ड) चमोली जिले में स्थित इस झील के तट पर सिक्खों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने तप किया था . इस झील के पास एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा भी हैं (हेमकुण्ड साहिब ) और लक्ष्मण का मंदिर भी हैं ये झील 7 पर्वतो से घिरी हैं . इसी झील से अलकनंदा की सहायक लक्ष्मण गंगा नदी भी निकलती हैं . 



 ● सतोपंथ ताल - चमोली जिले में बद्रीनाथ में स्थित हैं . इस झील में 3 कोण हैं जहाँ बेहमा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी . पांडव यही से स्वर्ग लोक को गये थे इस झील के पास सूर्यकुण्ड व चंद्रकुंड नामक दो झील और भी हैं अलकनंदा नदी का उदगम इसी झील से होता हैं .



 ● बद्रिताल / गोना झील - यह चमोली जिलेमें स्थित हैं . ब्रिटिश काल में यहाँ नाव चलती थीं



 . ● बेनीताल - चमोली जिले के कर्णप्रयाग व नंदप्रयाग के मध्य में स्थित है . इस झील के पास नंदा देवी का मंदिर भी हैं 



. ● लिंगाताल - चमोली में फूलो की घाटी के मध्य में स्थित हैं . सूर्य के रौशनी पड़ने पर यह काफी सुन्दर दिखाई देती गया हैं . 



 ● मात्रीकाताल - चमोली जिले मे फूलो की घाटी में स्थित हैं . इस झील को देवियो की झील या मात्रशक्ति भी कहा जाता हैं !


● दोस्तों इस Post को आप ज्यादा से ज्यादा Share कीजिये जिससे आपके दोस्तों को भी जानकारी प्राप्त हो जाये !

Thursday, 1 June 2017

Uttrakhand का इतिहास | History Of Uttrakhand | Online Classes,,

Vishal Online
 Classes में आपका स्वागत हैं 





दोस्तों आज इस पोस्ट में हमने आपको Uttrakhand  का इतिहास ( History Of Uttrakhand )
के बारे में बताया हैं ।



● Uttrakhand भारत के उत्तर पश्चिम में 28°43 से 31°27 उत्तरी अक्षांशो तथा 77°34 पूर्वी देशांतर से 81°02 देशांतर के पूर्व में स्थित हैं !

 ● इसके पूर्व में नेपाल, उत्तर में हिमालय पार तिब्बत चीन, पश्चिमी प्रदेश तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश स्थित है  इसकी सीमा बनाने का कार्ये उत्तर में तिब्बत हिमालय पश्चिम मध्य तराई में टोंस नदी, पूर्व में काली नदी दक्षिण पूर्व तथा दक्षिण पश्चिम में शिवालिक इसका विभाजन करता हैं !

 ● Uttrakhand में आंतरिक जिलो की संख्या 4 हैं

 ● कुमाऊँ में आंतरिक जिलो की संख्या 2 हैं
 ●  1. बागेश्वर
 ● 2. अल्मोड़ा

 ● गढ़वाल में आंतरिक जिलो की संख्या 2 हैं
 ● 1. टिहरी गढ़वाल
 ● 2. रुद्रप्रयाग

 ● गढ़वाल का क्षेत्रफल ----- 32449 K/m

 ● कुमाऊँ का क्षेत्रफल -----21034 K/m

 ● और पूरे उत्तराखण्ड का क्षेत्रफल ----- 53483 K/m

 ● देश के सन्दर्भ में Uttrakhand का क्षेत्रफल ---- 1.69%

 ● क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तराखण्ड का स्थान --- 19वाँ

 ● राज्य के कुल क्षेत्रफल में पर्वतीय एवं मैदानी भाग क्रमशः --- 88% व 12%

 ● राज्य के कुल क्षेत्रफल में कुमाऊँ और गढ़वाल भाग क्रमश: --- 60.67 व 39.33%



Uttrakhand का भौगोलिक विभाजन 

टोंस हिमालय का विस्तार उत्तराखण्ड के उत्तर पूर्वी भाग में उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ आदि जनपदों में हैं  इस हिमालय का निर्माण अवषादी शैलो से हुआ हैं जो दक्षिण में भ्रंश के द्वारा वृहद हिमालय या ग्रेट हिमालय से अलग होता हैं इसकी खोज 1963 में स्वेन हेडिन ने की थी !

 ● वृहद हिमालय (Great/महान) लघु हिमालय के उत्तर तथा ट्रॉन्स के दक्षिण में स्थित हैं इसके आंतरिक भाग में ग्रेनाइट, नीश, शिष्ठ, आदि प्राकृतिक खनिज पाये जाते हैं इस हिमालय की चौड़ाई लगभग 30- 50 K/m तथा उचाई लगभग 3000-7877 (नंदादेवी) तक हैं  यह हिमालय, उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, आदि 6 जनपदों में पूरब से पश्चिम से पूरब की और फैला हुआ हैं  इस हिमालय की चोटियों में नंदादेवी, बन्दरपूँछ, केदारनाथ, सतोपंथ, चौखंभा, त्रिसूल, दुनादिरी, पंचाचूली भागीरथी, नंदाकोटा, नंदाखाट, गंगोत्री, यमुनोत्री, आदि आते हैं !

 ● मध्य या Cows हिमालय---> का निर्माण शिवालिक के उत्तर तथा बृहद के दक्षिण में स्थित हैं इसके अंतर्गत नैनीताल, अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, आदि पूरब से पश्चिम में मिला हुआ है इसकी चौड़ाई लगभग --- 700 से 100 k/m  ऊँचाई --- 1200 से 4500 मी. हैं  इस हिमालय में नागडिब्बा तथा मसूरी आदि चोटिया भी हैं इस हिमालय से रामगंगा, लाधिया, नयार आदि नादिया निकलती हैं इसी हिमालय में नैनीताल, नोकुटियाताल, सातताल, खुर्पाताल, भीमताल आदि झीले भी आती हैं इस श्रेणी में छोटे -छोटे घास के मैदान पाएं जाते हैं जिन्हें कुल्लू में व्यय, कश्मीर में सोल्वर्ग गुलमर्ग तथा Utrakhand में मयार कहते हैं !

 ● शिवालिक हिमालय:-- शिवालिक हिमालय, लघु हिमालय के दक्षिण में तथा भाबर के उत्तर में स्थित हैं पर्वत श्रेणी हिमालय के सबसे दक्षिण में स्थित है जिसके अंतर्गत दक्षिणी देहरादून, उत्तरी हरिद्वार, दक्षिणी टिहरी गढ़वाल अल्मोड़ा, मध्यवर्ती पौड़ी, दक्षिणी अल्मोड़ा, मध्यवर्ती नैनीताल, दक्षिणी चंपावत आदि 7 जिलो में पूरब से पश्चिम या या पश्चिम से पूरब स्थित हैं इसकी चौड़ाई 10 -15 K/m हैं तथा कही -कही पर 50 K/m हैं इसकी ऊँचाई 750 - 1200 मी. के बीच हैं देहरादून के मदारसू, बाराकोट, तथा ऋषिकेश के पास क़ी डोलोमेट की चट्टान से चूना भी मिलत हैं !

 ● दून/द्वार - शिवालिक हिमालय के उत्तर और मध्य हिमालय के दक्षिणी भागो को पश्चिम व मध्य भाग में दून तथा पूर्वी भाग में द्वार कहा जाता हैं ।

 ● भाबर - शिवालिक श्रेणियो के दक्षिणी भाग से जुड़े हुए मैदानी भाग को भाबर कहते है जहां बड़े -बड़े पत्थर , रेत, बजरी की विक्षेपण होता हैं यहाँ पर नदिया क्रोहित/विलुप्त हो जाती हैं ।

 ● तराई क्षेत्र - भाबर के दक्षिण में 20 - 30 Km. चौड़ाई वाले भाग को तराई कहते हैं ये क्षेत्र अत्यधिक उपजाऊ भी होता हैं भाबर में विलुप्त नदिया इस क्षेत्र की जनसंख्या का घनत्व भी अधिक होता हैं इसके अंतर्गत हरिद्वार, पौड़ी- गढवाल, नैनिराल तथा उधम सिंह नगर के दक्षिणी क्षेत्र आते है ।

 ● गंगा का मैदान - दक्षिणी हरिद्वार का अधिकांश भाग गंगा के मैदानी क्षेत्र का ही ऐक भाग हैं इस क्षेत्र में गंगा तथा उसकी सहायक नदीयो के द्वारा लाई गई मृदा के कारण यह क्षेत्र अत्याधिक उपजाऊ भी हैं इसलिए इस क्षेत्र में रहने वाले लोग कृषि कार्य में लगे रहते हैं इस क्षेत्र में धान, गेंहू मुख्यता उगाई जाती हैं ।

तो दोस्तों ये इस पोस्ट का पहला अभ्यास हैं दूसरे अभ्यास में Uttrakhand के पडोसी क्षेत्र बारे में बताएंगे अगर आपको ये जानकारी पसंद आये तो इसको like करे और इसको ज्यादा से ज्यादा Share करे धन्यवाद

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